बागवानी (Horticulture): ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता का भविष्य
भारत की कृषि व्यवस्था अब केवल धान, गेहूं और गन्ने तक सीमित नहीं रही। जैसे-जैसे समय बदला है, किसानों की सोच और जरूरतें भी बदली हैं। ऐसे में बागवानी (Horticulture) एक ऐसा क्षेत्र बनकर उभरा है, जो न सिर्फ कम लागत और कम ज़मीन में बेहतर उत्पादन देता है, बल्कि इससे ग्रामीण युवा भी स्वरोज़गार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
बागवानी को कृषि की “उच्च श्रेणी” माना जाता है क्योंकि इसमें उत्पादन के साथ-साथ सौंदर्य, पोषण और औषधीय महत्व भी जुड़ा होता है।
बागवानी केवल एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने का एक सशक्त माध्यम है। यदि इसे वैज्ञानिक तरीके से अपनाया जाए तो यह किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को भी साकार कर सकता है।
🧭 बागवानी क्या है?
बागवानी, जिसे अंग्रेजी में Horticulture कहा जाता है, केवल फूल, फल और सब्ज़ियों की खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जो ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बनता जा रहा है।
बागवानी एक ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें फलों, सब्ज़ियों, फूलों, औषधीय पौधों, और सजावटी पौधों की खेती की जाती है। यह परंपरागत खेती से थोड़ा अलग होती है क्योंकि इसमें फसलों की देखरेख, पौध संरक्षण, सिंचाई, ग्राफ्टिंग (कलम विधि), और बाज़ार तक पहुँच का विशेष ध्यान दिया जाता है।
बागवानी का महत्व :-
भारत एक कृषि प्रधान देश है, और बदलते मौसम व भूमि की विविधता के कारण यहाँ बागवानी की अपार संभावनाएं हैं। बागवानी में मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्र शामिल होते हैं:
• 🍎 फलोत्पादन (Pomology) – जैसे आम, अमरूद, सेब, केला आदि।
• 🥦 सब्ज़ी उत्पादन (Olericulture) – जैसे टमाटर, भिंडी, आलू, मिर्च आदि।
• 🌸 फूलों की खेती (Floriculture) – जैसे गुलाब, गेंदा, जूही आदि।
• 🌿 औषधीय पौधे (Medicinal Plants) – जैसे आंवला, तुलसी, अश्वगंधा, एलोवेरा आदि।
क्यों अपनाएं बागवानी?
1. कम जमीन में ज़्यादा उत्पादन: बागवानी फसलें कम क्षेत्र में उगाई जा सकती हैं और इनसे अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
2. रोज़गार के नए अवसर: युवा वर्ग बागवानी में स्वरोज़गार शुरू कर सकते हैं जैसे नर्सरी, फूलों का व्यवसाय, प्रोसेसिंग यूनिट आदि।
3. पोषण सुरक्षा: फल और सब्ज़ियाँ पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जो ग्रामीण आबादी के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
4. जलवायु के प्रति अनुकूल: कुछ बागवानी फसलें सूखा, कम पानी या गर्मी में भी उगाई जा सकती हैं।
सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ :-
• राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM)
• प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना
• बागवानी के लिए ट्रैक्टर व सिंचाई यंत्रों पर सब्सिडी
सफल बागवानी के लिए सुझाव:-
• उन्नत किस्में अपनाएं – जैसे हाईब्रिड बीज और रोगरोधी किस्में।
• जैविक खेती को बढ़ावा दें – रासायनिक उर्वरकों की बजाय कम्पोस्ट और गोबर खाद का प्रयोग करें।
• ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों से पानी की बचत करें।
• बाज़ार से जोड़ाव – स्थानीय मंडियों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या किसान उत्पादक संगठन (FPO) से जुड़ें।

🌱 RKSHR का उद्देश्य :-
हमारा उद्देश्य है कि गांवों में रहने वाले किसानों और युवाओं को बागवानी से जुड़ी सही जानकारी और बाज़ार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाए।
📞 संपर्क
Instagram: @rkshr_krishi
Email: rkshr.krishi@gmail.com
Website: www.rkshr.com
