बरसाती प्याज़ की खेती

1. परिचय

प्याज़ भारत की सबसे महत्वपूर्ण सब्जी फसलों में से एक बारिशी प्याज़ (खरीफ प्याज़) की खेती खासतौर पर उन किसानों के लिए लाभकारी है, जिनके पास सिंचाई के साधन सीमित हैं। इस फसल में पानी की जरूरत का बड़ा हिस्सा प्राकृतिक वर्षा से पूरा हो जाता है, जिससे लागत कम आती है और उत्पादन अच्छा मिलता है। प्याज़ की खेती भारत के लगभग हर राज्य में की जाती है। खरीफ (बरसाती) सीजन में इसकी खेती दो प्रमुख तरीकों से की जाती है: बीज से पौध तैयार कर रोपाई और कांदी (सेट्स) से सीधे रोपण. इस पोस्ट में दोनों विधियों का पूरा विवरण, तुलना, और प्रैक्टिकल सुझाव दिए गए हैं।

2. उपयुक्त समय
विधि बुवाई                                                  रोपण समय फसल अवधि
बीज से (नर्सरी → रोपाई)              जून के आखिरी सप्ताह – जुलाई का पहला पखवाड़ा 90–110 दिन
कांदी से (सेट्स/गांठ)                    जुलाई का पहला – मध्य सप्ताह 80–90 दिन


3. जलवायु व मिट्टी
तापमान: 20°C–30°C. मिट्टी: बलुई दोमट / दोमट, pH 6.0–7.5। पानी निकासी अच्छी होनी चाहिए — बारिश के पानी का रुकना प्याज़ के लिए हानिकारक है।

4. उपयुक्त किस्में (सिफारिश)
बीज विधि: अरका कल्याण, नासिक रेड, एन-53, अरका निकेतन
कांदी विधि: एन-53 और स्थानीय सेट्स जो खरीफ में अच्छा प्रदर्शन करते हैं


5. भूमि तैयारी
1–2 बार गहरी जुताई, 2–3 हल्की जुताई व पाटा। 1 मीटर चौड़ी उठी हुए क्यारियां बनाएं और किनारों पर नालियाँ रखें ताकि पानी जमा न हो।

6. रोपण विधि (विस्तृत)
     बीज से (नर्सरी → रोपाई)
बीज मात्रा: 8–10 किग्रा/हेक्टर
बुवाई: नर्सरी में 45–50 दिन के पौधे तैयार करें
रोपाई दूरी: पंक्ति x पौधा = 15 x 10 सेमी
बीज उपचार: थिरम/कार्बेन्डाजिम 2–3 ग्राम/किग्रा
      कांदी से (सेट्स/गांठ)
कांदी आकार: 1.5–2.5 सेमी व्यास, स्वस्थ और सूखी
रोपण गहराई: 2–3 सेमी
दूरी: पंक्ति x पौधा = 15–20 x 10 सेमी
कांदी ऊपर की ओर (नोक ऊपर) रखें और हल्का दबाएं


7. उर्वरक व खाद प्रबंधन
उर्वरक (प्रति हेक्टेयर)            बीज विधि               कांदी विधि
गोबर की खाद                    20–25 टन                20 टन
नाइट्रोजन (N)                  100 किग्रा                   80 किग्रा
फास्फोरस (P₂O₅)            50 किग्रा                     50 किग्रा
पोटाश (K₂O).                 50 किग्रा                     50 किग्रा
नोट: आधी N और पूरी P–K खेत की तैयारी में दें; बाकी N 30–45 दिन बाद दें।

8. सिंचाई व खरपतवार नियंत्रण
बरसात में पानी जमा न होने दें; बारिश कम होने पर 7–10 दिन पर हल्की सिंचाई दें। पहली निराई-गुड़ाई 20–25 दिन बाद करें; कुल 2–3 बार अपर्याप्त खरपतवार नियंत्रण के लिए पर्याप्त है।

9. रोग व कीट प्रबंधन
बैंगनी धब्बा (Purple blotch): मैनेकोजेब 2.5 ग्राम/लीटर पानी
तना गलन (Stem rot): कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम/लीटर
थ्रिप्स / प्याज़ मक्खी: इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मि.ली./लीटर


10. उपज व भंडारण
विधि                   उपज (औसत)                        फसल अवधि
बीज विधि         150–200 क्विंटल/हेक्टेयर        90–110 दिन
कांदी विधि        120–150 क्विंटल/हेक्टेयर.        80–90 दिन

RKSHR सुझाव:

यदि आपका बाजार जल्दी शुरुआती प्याज़ (early-season) की मांग देता है तो कांदी विधि अपनाएँ; यदि आप अधिक उपज और बेहतर कीमतों के लिए समय दे सकते हैं तो बीज विधि अपनाएँ।

कांदी से निकली फसल जल्दी तैयार होती है पर भंडारण क्षमता सीमित होती है — जल्दी बेचने की सलाह है।

🌱 RKSHR (Rural Krishi Solutions for Horticulture & Regrowth) का उद्देश्य :-आपके खेत से जुड़ी हर जरूरत का समाधान – एक जगह पर।
हमारा उद्देश्य है कि गांवों में रहने वाले किसानों और युवाओं को  सही जानकारी और बाज़ार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाए।
📞 संपर्क
Instagram: @rkshr_krishi
Email: rkshr.krishi@gmail.com
Website: www.rkshr.com

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *